पालक खाने के लाजवाब फायदे

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 पालक में जो गुण पाए जाते हैं, वे सामान्यतः अन्य शाक-भाजी में नहीं होते। यही कारण है कि

पालक स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी है, सर्वसुलभ एवं सस्ता है।पालक खाने के

फायदे है। यह भारत के प्रायः सभी प्रांतों में बहुलता से सहज मिल जाता  है। इसका पौधा लगभग

एक से डेढ़ फुट ऊँचा होता है। इसके पत्ते चिकने, मांसल व मोटे होते हैं। यह साधारणतः शीत ऋतु

में अधिक पैदा होता है, कहीं-कहीं अन्य ऋतुओं में भी इसकी खेती होती है।

फायदे है। यह भारत के प्रायः सभी प्रांतों में बहुलता से सहज मिल जाता  है। इसका पौधा लगभग

एक से डेढ़ फुट ऊँचा होता है। इसके पत्ते चिकने, मांसल व मोटे होते हैं। यह साधारणतः शीत ऋतु

में अधिक पैदा होता है, कहीं-कहीं अन्य ऋतुओं में भी इसकी खेती होती है।

paalak ke fayde

पालक कैसे खाएं

पालक प्रोटीन , विटामिन , खनिज और फाइबर से भरपूर होता है। इसमें पानी में घुलनशील तथा

वसा में घुलनशील दोनों प्रकार के विटामिन  होते हैं। यह विटामिन K , विटामिन  A , विटामिन E ,

विटामिन B2 , विटामिन B6, मेग्नेशियम तथा आयरन का भंडार है।

इसके अलावा इसमें विटामिन C , विटामिन  B1 , B3 , मेगनीज , फोलेट , कॉपर , कैल्शियम ,

पोटेशियम प्रचुर मात्रा में होते है। यह फास्फोरस , ज़िंक , सेलेनियम तथा ओमेगा -3 फैटी एसिड का

भी अच्छा स्रोत है। पालक में कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट , फिटोनुट्रिएंट्स तथा फ्लेवोनोइड्स भी

पाए जाते है।


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लौह तत्व मानव शरीर के लिए उपयोगी, महत्वपूर्ण, अनिवार्य होता है। लोहे के कारण ही शरीर के

रक्त में स्थित रक्ताणुओं में रोग निरोधक क्षमता तथा रक्त में रक्तिमा (लालपन) आती है। लोहे की

कमी के कारण ही रक्त में रक्ताणुओं की कमी होकर प्रायः पाण्डु रोग उत्पन्न हो जाता है। लौह तत्व

की कमी से जो रक्ताल्पता अथवा रक्त में स्थित रक्तकणों की न्यूनता होती है, उसका तात्कालिक

प्रभाव मुख पर विशेषतः ओष्ठ, नासिका, कपोल, कर्ण एवं नेत्र पर पड़ता है, जिससे मुख की रक्तिमा

एवं कांति विलुप्त हो जाती है। कालान्तर में संपूर्ण शरीर भी इस विकृति से प्रभावित हुए बिना नहीं

रहता।

पालक के फायदे 

हड्डी तथा दांत

पालक में विटामिन k की भरपूर मात्रा होती है। यह विटामिन कैल्शियम के अवशोषण को सुधारता

है तथा पेशाब के माध्यम से निकलने वाले कैल्शियम को रोकता है। इस प्रकार हड्डी को मजबूत

बनाये रखने में सहायक होता है।

विटामिन K के अलावा Paalak से मिलने वाले मेगनीज, कॉपर , मेग्नेशियम , ज़िंक तथा फास्फोरस

आदि तत्व हड्डियों की मजबूती में योगदान देते हैं। ये तत्व दांत और नाख़ून भी मजबूत बनाते हैं।

मसूड़ों के लिए भी पालक फायदेमंद होता है। कच्चा Paalak चबाकर खाने से पायरिया में आराम

मिलता है। पालक का रस एक कप और एक कप गाजर का रस मिलाकर सुबह खाली पेट पीने

से मसूड़ों से खून आना बंद होता है।

paalak juice se milne waale labh

आयुर्वेद के अनुसार पालक की भाजी सामान्यतः रुचिकर और शीघ्र पचने वाली होती है। इसके

बीज मृदु, विरेचक एवं शीतल होते हैं। ये कठिनाई से आने वाली श्वास, यकृत की सूजन और पाण्डु

रोग की निवृत्ति हेतु उपयोग में लाए जाते हैं। गर्मी का नजला, सीने और फेफड़े की जलन में भी यह

लाभप्रद है। यह पित्त की तेजी को शांत करती है, गर्मी की वजह से होने वाले पीलिया और खाँसी में

पालक खाने के फायदे है।

आँखों के लिए

पालक से मिलने वाले बीटा केरोटीन तथा ल्यूटेन आँखों के लिए फायदेमंद है। ऑंखें सूखी-सूखी

रहती हों , आँखों में जलन होती हो तो पालक नियमित खाने से लाभ होता है। पालक में सूजन और

जलन दूर करने का गुण होता है। पालक खाने के लाजवाब फायदे है।

इसके अलावा पालक में पाए जाने वाले तत्व उम्र बढ़ने पर मैक्युला को ख़राब होने से बचाने में

जरुरी भूमिका अदा करते हैं। पालक से मिलने वाले एंटीऑक्सीडेंट फ्री रेडिकल के नुकसान से

बचाकर आँख को ग्लूकोमा , मोतियाबिंद आदि समस्या से बचाते हैं।

मांसपेशियों की मजबूती

पालक में पाए जाने वाले  विशेष प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट्स तथा प्रोटीन मांसपेशियों को मजबूती देते

है विशेष कर हृदय की मांसपेशी के लिए यह बहुत लाभदायक होता है। पालक में पाया जाने वाला

प्रोटीन शरीर आसानी से शरीर ग्रहण कर लेता है। इससे घाव आदि भरने में भी मदद मिलती है ।

paalak ke chamatkari laabh

पालक से नुकसान

खनिजों का अवशोषण

पालक में ऑक्जेलिक एसिड काफी मात्रा में होता है। इस तत्व में खनिज के साथ चिपकने की प्रवृति

होती है। यह कैल्शियम , मेग्नेशियम , ज़िंक आदि खनिज के साथ चिपक जाता है जिसके कारण

शरीर इन खनिजों को अवशोषित नहीं कर पाता। इस वजह से शरीर की सामान्य प्रक्रिया बाधित

होकर खनिज लवण की कमी हो सकती है। अतः बहुत अधिक मात्रा में Palak का उपयोग सही

नहीं होता है।

पेट की समस्या

पालक फाइबर का एक अच्छा स्रोत है। केवल एक कप पालक के सेवन से ही शरीर को तकरीबन

6 ग्राम फाइबर मिल जाता है।

भले ही फाइबर पाचन के लिए जरुरी है लेकिन शरीर को इसका आदि होने में समय लगता है,

इसीलिए पालक का अधिक सेवन शरीर के लिए खतरनाक होता है और इससे पेट में दर्द और गैस

की शिकायत बनी रहती है।

ऐसी अवस्था से बचने के लिए थोड़ा-थोड़ा पालक का सेवन नियमित रूप से करना चाहिए।

पालक के नुकसान एनीमिया में

हाँ, आपने बिलकुल सही सुना, पालक के ज्यादा सेवन से एनीमिया की शिकायत हो सकती है।

पालक के अधिक सेवन से शरीर खाये हुए खाने से उचित मात्रा में आयरन अवशोषित नहीं कर

पाता है। इसी कारण एनीमिया की समस्या बढ़ सकती है।


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