मांस खाने के हैरान करने वाले नुकसान

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आज के समय में बहुत से लोग अपनी सेहत का ख्याल रखने के लिए मांसाहार छोड़ रहे हैं और

शाकाहारी बन रहे हैं। इसमें कोई शक नहीं है कि मीट का नाम सुनते ही बहुत से लोगों के मुंह में

पानी आ जाता है। यह खाने में जितना स्वादिष्ट होता है, उतने ही सेहत के लिए हानिकारक भी होता

है। सारी दुनिया में भारत ही एक ऐसा देश है, जहां सबसे ज्यादा शाकाहारी लोग रहते हैं। इसकी

एक वजह हमारे शास्त्र द्वारा इसकी इजाजत ना देना है। हिंदू धर्मग्रंथ के अनुसार मांस खाना इंसान

के शरीर के लिए नुकसानदेय है। वहीं कुछ वैज्ञानिक कारण भी हैं जो बताते हैं कि शरीर के लिए

मांसाहार कितना बुरा है। मांस खाने के हैरान करने वाले नुकसान हैं।

maansaahar hai sehat ke liye haanikaarak

यौगिक तंत्र में शरीर और मन को अलग-अलग करके नहीं देखा जाता। आपका मस्तिष्क देह का

ही हिस्सा है। आम तौर पर हम जिसे मन कहते हैं, वो थोड़ी याद्दाश्त और बुद्धि है। बाकी शरीर और

मस्तिष्क के बीच, किसके पास ज्यादा समझ और किसके पास ज्यादा स्मृति है? अगर आप ध्यान से

देखें तो आपके शरीर के पास लाखों साल पुरानी याद्दाश्त है। इसे अच्छी तरह याद है कि आपके

पूर्वज क्या थे। मन याददाश्त का दावा नहीं कर सकता। मांस खाने के हैरान करने वाले नुकसान हैं।


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मांस हमारे शरीर के लिए नुकसानदेय

1.)  मांस खाने वाले ज्यादातर लोगों के अंदर चिड़चिड़ापन और ज्यादा गुस्सा होने के लक्षण पाए

जाते हैं। ऐसे लोग स्वभाव से बहुत ज्यादा उग्र होते हैं। मांस खाने से आपके शरीर और मन दोनों

अस्वस्थ बन जाते हैं।

2.)  मांसाहारी खाने वाले लोग शाकाहारी की तुलना में गंभीर बिमारियों की चपेट में ज्यादा आते हैं।

इन बीमारियों में हाई ब्लड प्रशेर, डायबिटिज, दिल की बीमारी, कैंसर, गुर्दे का रोग, गठिया और

अल्सर शामिल हैं।

maansahar ke mann par prabhaav

3.) मांसाहार की तुलना में शाकाहारी भोजन सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है। शाकाहारी भोजन

करने से इंसान स्वस्थ, दीर्घायु, निरोग और तंदरुस्त बनाता है।

4.) मांस खाने से इंसान की उम्र भी कम होती है।

5.)  विज्ञान के अनुसार शाकाहारी लोग मासांहार करने वालों की तुलना में डिप्रेशन का शिकार कम

बनते हैं।

6.) विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार मांसाहार का सेवन करना हमारे शरीर के लिए

उतना ही नुकसानदायक होता है जितना कि धूम्रपान असर करता है। इस रिपोर्ट में यह भी कहा

गया है कि पका हुआ मांस खाने से कैंसर का खतरा बना रहता है।

मन पर मांस का प्रभाव

हम जैसा भोजन करते हैं, उसका हमारे मन पर गहरा असर होता है। एक औसत अमेरिकी प्रतिवर्ष

दो सौ पाउंड मीट खा लेता है। अगर आप इस मात्रा को पचास पाउंड तक ला सकें तो देखेंगे कि 75

प्रतिशत लोगों को एंटीडिप्रेसेंट दवाओं की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। अगर आप रेगिस्तान या जंगल में

हैं, तो मीट एक अच्छा भोजन का हो सकता है, क्योंकि यह आपको ज्यादा देर तक जिंदा रख

सकता है। अगर आप कहीं खो जाएं, तो मीट के सहारे समय बिता सकते हैं, क्योंकि इसकी थोड़ी

मात्रा में ज्यादा पोषण होता है। जबकि आपके पास दूसरे विकल्प मौजूद हैं तो इसे रोजमर्रा के खाने

में शामिल नहीं करना चाहिए।

meat khaana se hote ye dushprabhaav

मान लें कि अगर आपको कहीं से पता चले कि आज आप सबको मार दिया जाएगा। कल्पना

कीजिए कि आपके भीतर कैसा संघर्ष और रसायनिक प्रतिक्रिया पैदा होगी। जानवर भी, कुछ समय

तक ही सही, इसी मनोदशा में रहता है। जब आप उसे मारते हैं तो उसके मांस में वे नकारात्मक

एसिड भी मिल जाते हैं। जब आप उसे खाते हैं तो उससे आपके भीतर अनावश्यक मानसिक उतार

चढ़ाव पैदा होते हैं।

अगर आप एंटीडिप्रेसेंट दवा खाने वाले रोगियों को लगातार शाकाहारी भोजन पर रखें तो तीन माह

में ही उन्हें दवाओं की जरूरत नहीं रहेगी।


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