जल नेती योग क्रिया से बंद नाक को करें साफ

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जब मौसम बदलता है तो शरीर के कुछ अंग तुरंत इससे प्रभावित हो जाते हैं, खासतौर पर नासिका

द्वार और गला। हममें से कई लोगों को मौसम बदलने पर अक्सर नाक बंद होने, नाक जमने, छींक

आने, आंखों में खुजली महसूस होने व कंजेस्शन की समस्या का सामना करना पड़ता है। अगर ये

लक्षण बहुत तीव्र हैं तो डॉक्टर के पास जाना जरूरी हो जाता है लेकिन अगर ये लक्षण कम तीव्र हों

परन्तु परेशान कर रहे हों तो जल नेती क्रिया से राहत पाई जा सकती है।

jal neti se hote hai shariric fayde

योग में मुख्यतः छह क्रियाएँ होती है त्राटक, नेती, कपालभाती, धौती, बस्ती और नौली| शरीर को

स्वस्थ और शुद्ध करने के लिए इन् क्रियाओं का विशेष महत्त्व है| जिन्हे षट्कर्म कहा जाता है|

शारीरिक शुद्धि के बिना आसान – प्राणायाम का पूर्ण लाभ नहीं प्राप्त हो सकता है|

नेती क्रिया मुख्यत: सिर के अंदर वायु-मार्ग को साफ़ करने की क्रिया है। इसे करने से प्राणायाम

करने में भी आसानी होती है तथा इसे तीन तरह से किया जाता है सूत नेती, जल नेती, और कपाल

नेती। इन् तीनो क्रिया का अपना अलग महत्त्व है| आज हम आपको जल नेती क्रिया, के बारे में

बताने जा रहे है|


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जल नेती क्रिया की विधि

जल नेती क्रिया करने के लिए सबसे अधिक जरुरी चीज होती है नालीदार बर्तन| आप कोई ऐसा

बर्तन या लोटा लें, जिसमें नली लगी हो, इससे आपको पानी नाक में डालने में आसानी होगी|

जल नेती क्रिया बहुत ही आसान और कम समय में होने वाली क्रिया है| इसमें नालीदार बर्तन के

अलावा, हल्का गुनगुना पानी, जो अधिक गर्म न हो तथा तीसरी चीज जो इस क्रिया में काम आती है|

वह है नमक| इसमें हलके गुनगुने पानी में थोड़ा सा नमक भी मिलाया जाता है|

-> हल्के गर्म पानी में आधा चम्मच नमक मिलाएं और नेती के बर्तन में भर लें। अब नाक के एक

छेद में नली से पानी डालें। अगर आपको सर्दी हो रही है तो जो छेद बंद हो उसमें पहले डालें। धीरे-

धीरे पानी डालें और लंबी सांस न लें। यह पानी नाक के दूसरे छेद से निकलना चाहिए और मुंह खुला

रखें। अब इस प्रक्रिया को नाक के दूसरे छेद से करें। दोनों छेद से यह प्रक्रिया करने के बाद सीधे

खड़े हो जाएं। गहरी सांस लें और फिर जल्दी-जल्दी कई बार सांस छोड़ें।

jal neti ke fayde

जल नेती क्रिया के लाभ

1.) यह क्रिया करने से मष्तिष्क को ठंडक पहुंचती और भारीपन दूर होता है| जिससे दिमाग शांत,

हल्का, तनाव मुक्त तथा थकान आदि से रहत दिलाता है|

2.) इस क्रिया के अभ्यास से नाक में जमे बैक्टीरिया का नाश होता है और नाक की सफाई भी हो

जाती है| साथ ही कान, नाक, दाँत, गले आदि के कई रोग नहीं हो पाते और आँख की दृष्टि भी तेज

होती है।

3.) इसके नियमित अभ्यास से सर्दी, जुकाम और खाँसी की शिकायत बिलकुल समाप्त हो जाती है|

4.) जलनेति क्रिया करने से दमा, टी.बी., खाँसी, नकसीर, बहरापन तथा अनेक छोटी-मोटी 1500

बीमीरियाँ दूर होती हैं। साथ ही इसके अभ्यास से धूम्रपान की आदत छूट जाती है|

jal neti aur sutra neti ke fayde

बरतें ये सावधानियां

कोई भी क्रिया तभी लाभ पहुंचाती है जब उसे करते हुए सावधानी बरती जाए। जल नेती क्रिया

करते हुए भी सावधानी बरतनी जरूरी होती है। नाक, गले, कान, दाँत, मुँह या दिमाग में किसी भी

प्रकार की समस्या होतो नेती क्रिया योगाचार्य के मार्गदर्शन में करना चाहिए। इसे करने के बाद

कपालभाती कर लेना चाहिए।


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