चीनी खाने के भयंकर नुकसान

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चीनी के नुकसान है।चीनी को सफेद ज़हर कहा जाता है। जबकि गुड़ स्वास्थ्य के लिए अमृत है।

क्योंकि गुड़ खाने के बाद वह शरीर में क्षार पैदा करता है जो हमारे पाचन को अच्छा बनाता है। दिन

के अधिकतर समय बैठे रहने की जीवनशैली के अलावा मानसिक तनाव, अपर्याप्त नींद इन

महामारियों के मुख्य कारण हैं और इसी वजह से नमक व चीनी की खपत भी बढ़ रही है। यह

क्रिस्टलाइज़ सूक्रोज, फ्रुक्टोज और ग्लूकोज का एक संयोजन का एक रूप है, जिसे गन्ने के रस से

निकाला जाता है। चीनी के अधिक सेवन से कई प्रकार की समस्याएं हो सकती है। आपने सुना ही

होगा कि चीनी का सेवन करने से दांत खराब हो जाते हैं। जब भी कभी हमारा मीठा या चीनी खाने

का मन होता है तब हम चाय, कॉफी या केक के फॉम में अपनी शुगर क्रेविंग्स को खत्म कर लेते हैं।

चीनी के नुकसान है।

चीनी के नुकसान

1.) इसकी लत लग जाती है

आपको लगता है कि केवल कोकीन और मेथ की लत लगने का ही डर होता है, तो आपको शायद

पता नहीं कि चीनी आपके लिए उससे भी ज़्यादा ख़राब साबित हो सकती है। चीनी आपको अच्छा

महसूस करानेवाले हार्मोन्स डोपामाइन को ट्रिगर कर सकती है, जिससे आप जब उदास या तनाव

में होते हैं तो आपको ज़्यादा से ज़्यादा मीठी चीज़ें खाने का मन करता है। स्टडीज़ का कहना है कि

मीठी चीज़ें और ड्रग्स के बीच जैविक समानताएं हैं। सबसे डरावनी बात यह है कि ऐसे लोग जो

कोकिन जैसे ड्रग्स लेते हैं, चीनी की वजह से उनकी लत और भी बढ़ सकती है। 


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2.) शक्कर रक्तगत शर्करा को बढाती हैं

शक्कर रक्तगत शर्करा को अतिशीघ्रता से बढाती हैं। इसे सात्म्य करने के लिए अग्नाशय की

कोशिकाएँ इन्सुलिन छोड़ती हैं। इन्सुलिन का सतत बढ़ती हुई माँग की पूर्ति करने से ये कोशिकाएँ

निढाल हो जाती है, इससे इन्सुलिन का निर्माण कम होकर मधुमेह होता है।

चीनी का सेवन करने से चीनी हमारे खून में घुलने लगती है और यह कुछ ऐसे प्रोटीन के साथ मिल

जाती है जो हमारी जवान त्वचा को एजिंग की तरफ ले जाते हैं। चीनी प्रोटीन को खराब करके

कोलेजन और इलास्टिन को भी खराब कर देती है। जिसके कारण स्किन में ड्राइनेस और त्वचा पर

झुरियां दिखाई देने लगती है।

chini khaane se bache

3.) चीनी से डिप्रेशन होता है

पीएमएस-की वजह से होनेवाली उदासी या सामान्य चिड़चिड़ापन होने पर आप एक चॉकलेट बार

खाकर खुद को खुश करने की कोशिश करती हैं।  हालांकि, आपको इस बारे में दोबारा सोचना

चाहिए। जी हां, स्टडीज़ में कहा गया है कि शक्कर का सेवन और डिप्रेशन एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

2012 की एक स्टडी में बताया गया ज़्यादा फ्रुक्टोज वाली चीज़ें खानेवाले युवाओं में कैंसर की

संभावना अधिक देखी गयी। यह इस बात की ओर भी इशारा करता है कि चीनी डिप्रेशन से जुड़ी

समसयाएं जैसे चिंता और तनाव को और बिगाड़ सकता है और दिमाग के काम करने के तरीके को

बदल सकता है। यानि खुद को खुश करने के लिए आप जो मीठी चीज़ें खाते हैं उनमें मौजूद चीनी

आपको दुखी बना सकती है।

4.) शक्कर से डिमेंशिया का ख़तरा बढ़ता है

स्टडीज़ के मुताबिक चीनी से अल्जाइमर जैसी न्युरोडीजनरेटिव बीमारिगों के जोखिम को बढ़ा

सकता है। 2013 की  एक स्टडी में कहा गया है कि स्वीटनर की वजह से संज्ञानात्मक नुकसान

आगे चलकर डिमेंशिया में बदल सकता है। स्टडीज़ में टाइप 2 डायबिटीज को बढ़ावा देने के लिए

पश्चिमी आहार और जीवन शैली, ज़्यादा शक्कर वाले खाद्य पदार्थ, कसरत की कमी और ज़्यादा

कैलोरी वाली डायट इसके बड़े कारण हैं। यह टाइप2 डायबिटीज़ और अल्जाइमर रोग के बीच एक

संबंध भी दिखाता है, जिसके मुताबिक टाइप2 डायबिटीज़ की वजह से अल्जाइमर का खतरा बढ़

सकता है।

chini shreer ke liye nuksaandaayak

-डब्लूएचओ का कहना है कि लोगों को खाने में शुगर की मात्रा कुल कैलोरी के दस प्रतिशत से कम

रखना चाहिए और इसे भविष्य में 5 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य निर्धारित कर लेना चाहिए।

शुगर के सीमित उपभोग की इस सलाह में भोजन में शामिल सभी तरह के मीठे के लिए लिए है,

इसमें शहद, फलों के जूस और फलों को भी शामिल किया गया है। चीनी के नुकसान है।


डब्लूएचओ ने साल 2002 में इस सिफारिश को मंजूरी दी थी कि दैनिक कैलोरी में शुगर की मात्रा

दस 10 फीसदी से अधिक नहीं होनी चाहिए। डब्लूएचओ के मुताबिक सामान्य वजन वाले वयस्क

के लिए दिन में 50 ग्राम शुगर की मात्रा पर्याप्त है।


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