भृंगराज के फायदे उपयोग और नुकसान

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भृंगराज एक प्रसिद्ध औषधि है जिसे बालों से जुड़ी समस्याओं और लीवर विकारों मैं उपयोग किया

जाता है । यह त्वचा रोगों खांसी अस्थमा आंख के रोग और  सिर की किसी भी हिस्से से संबंधित

बीमारियों के लिए प्रभावी दवा है यह बाल के विकास को बढ़ाता है। बालों का झड़ना कम करता है

और बालों के समय से पहले सफेद होने से बचाता है।

भृंगराज त्वचा के रंग को और चमक को बेहतर बनाता है कई त्वचा रोगों को रोकता है जैसे की

खुजली घाव अल्सर और त्वचा में पाई जाने वाली सूजन को कम करने में भृंगराज फायदेमंद है यह

लीवर के पित्त के उत्पादन को बढ़ाता है और जिगर के कार्यों को सुधार कर  कब्ज को ठीक करता

है और हमारे पाचन को सुचारु रुप से चलाने में सहायक होता है।

भृंगराज के फायदे उपयोग और नुकसान

भृंगराज के औषधीय भाग

औषधीय रूप में भृंगराज के पूरे पेड़ (पंचांग) को आयुर्वेदिक और हर्बल दवाइयां तैयार करने के

लिए उपयोग किया जाता है।भृंगराज जूस का उपयोग कई आयुर्वेदिक चीजों में किया जाता है

जिनमें भृंगराज तेल , नीलीभ्रादीदी तेल और महाभृंगराज तेल शामिल हैं ।

भृंगराज के फायदे

लीवर को स्वस्थ रखने में

स्वास्थ लाभ के रूप में भृंगराज के फायदे लीवर के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। यह

 हेपेटोप्रोटेक्टिवके रूप में कार्य करता है और लीवर की कोशिकाओं के पुनर्जन्म को उत्तेजित

करता है । पित्त के उत्पादन को बढ़ाता है जिससे हमारा पाचन सही रहता है और यह शरीर के

विषाक्त पदार्थों को तोड़ने और बाहर निकालने का काम करता है।

बालों को मजबूत बनाये

आयुर्वेद के मुताबिक बालों का झड़ना और बालों से जुड़ी अन्‍य समस्‍यायें पित्‍त दोष के कारण होती

हैं, और भृंगराज का तेल इसी समस्‍या को दूर करने में मदद करता है। यह बालों को बढ़ाने में मदद

करता है। नियमित तौर पर बालों में भृंगराज तेल से मसाज करने से स्‍कैल्‍प में रक्‍त प्रवाह बढ़ जाता

है। इससे बालों की जड़ें सक्रिय हो जाती हैं और बालों का बढ़ना शुरू हो जाता है। भृंगराज का तेल

को बनाते समय इसमें शिकाकाई, आंवला जैसी अन्‍य औषधियां भी मिलायी जा सकती हैं।

पेट दर्द

दस ग्राम भृंगराज के पत्तों में ३ ग्राम काला नमक मिलाकर पीसकर छान लें | इसका दिन में ३-४

बार सेवन करने से पुराना पेट दर्द भी ठीक हो जाता है |

बुखार में लाभ

दो-दो चम्मच भृंगराज स्वरस को दिन में २-३ बार पिलाने से बुखार में लाभ होता है |

खांसी दूर करने में

किसी को खांसी होने पर भृंगराज के रस को शहद के साथ उपयोग किया जाता है। यह थूक का

बनना बढ़ाता है और फेफड़ों को साफ करता है। यह फेफड़ों में बलगम बनने से रोकता है

और खांसी से राहत देता है।

bhringraaj ke laabh

नेत्र रोगों में लाभ

भृंगराज के पत्तों को छाया में सुखाकर पीस लें| इसमें से १० ग्राम चूर्ण लेकर उसमें शहद ३ ग्राम

और गाय का घी ३ ग्राम मिलाकर नित्य सोते समय रात्रि में चालीस दिन सेवन करने से कमजोर दृष्टी

आदि सब प्रकार के नेत्र रोगों में लाभ होता है|

bhringraaj ek ayurvedic aushidhi

भृंगराज के नुकसान

भृंगराज गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए पूरी तरह से सुरक्षित नहीं

माना जाता इसलिए भृंगराज का उपयोग करने से पहले एक आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह लेनी

चाहिए|


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