भ्रामरी प्राणायाम – विधि, फायदे, सावधानियां

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भ्रामरी प्राणायाम मन को शांत करने और क्रोध को दूर करने के लिए उत्तम प्राणायाम है। मन की

हताशा और निराशा दूर करने के लिए यह प्राणायाम बहुत ही उपयोगी है। यह प्राणायाम काफी

सरल है और इसे दिन में किसी भी वक्त कहीं भी किया जा सकता है। भ्रामरी प्राणायाम मन की

व्याग्रता मिटाने का सटीक उपाय है।

वास्तव में भ्रमर का अर्थ ही मधुमक्खी होता है। चूँकि इस प्राणायाम को करते वक्त व्यक्ति बिल्कुल

मधुमक्खी की तरह ही गुंजन करता है, इसलिए इसे भ्रामरी प्राणायाम कहते है|

भ्रामरी प्राणायाम

भ्रामरी प्राणायाम – विधि

1.) इस आसान को सूर्योदय और सूर्यास्त दोनों वक्त किया जा सकता है|

2.) सबसे पहले एक स्वच्छ और समतल जगह चुने और दरी बिछाये|

3.) अब ध्यान लगाने वाले आसन जैसे की पद्मासन या सुखासन में बैठ जाए।

4.) अपनी दोनों आँखों को बंद रखें तथा मन और चित्त को शांत रखें, दफ्तर के काम या तनाव देने

वाले अन्य किसी विचारो को मन में आने ना दे|

5.) अपने मेरुदंड को बिलकुल सीधा और दोनों हाथो को बगल में अपने कंधो के समांतर फैलाए।

6.) अब अपने हाथो को कुहनियो से मोड़ते हुए हाथ को कानों के समीप ले जाए।

7.) दोनों हाथों के अंगूठो से दोनों कानों को बंद कर लें।

8.) इस प्राणायाम में नाक से श्वांस भर कर धीरे-धीरे गले से भ्रमर की गुंजन के साथ श्वांस छोड़ना

होता है, इसलिए पहले नाक से श्वास अंदर लें और फिर बाहर छोड़े।

9.) इस बात का ध्यान रहे की श्वास बाहर छोड़ते समय कंठ से भवरे के समान आवाज करना हैं।

यह आवाज पूर्ण श्वास छोड़ने तक निरंतर निकालना है| और आवाज आखिर तक एक समान होना

चाहिए।

10.) ध्वनि तरंग को अपने मस्तिष्क में अनुभव करें व गुंजन करते वक्त जीभ को तालु से लगायें।

दांतों को खुला रखें किन्तु होठ बंद रहना चाहिए|

11.) इसके अभ्यास को 5 से 10  बार तक करें।

12.) श्वास लेने के लिए कोई अनुपात निर्धारित नहीं है अपने सामर्थ्य के अनुसार इसे भर सकते है।

लेकिन जितनी श्वास लेते बने उतनी ही ले, अनाव्यशक शरीर को तकलीफ ना दे|

13.) शरुआत में बिना कान बंद किये भी भ्रामरी प्राणयाम को किया जा सकता है|


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bhramari pranayam vidhi

भ्रामरी प्राणायाम – फायदे

1.) भ्रामरी प्राणायाम करने से साइनस के रोगी को मदद मिलती है। इस प्राणायाम के अभ्यास से

मन शांत होता है। और मानसिक तनाव दूर हो जाता है। भ्रामरी प्राणायाम उच्च रक्तचाप की बीमारी

से पीड़ित व्यक्ति को भी लाभदायी होता है।

2.) भ्रामरी प्राणायाम की सहायता से कुंडलिनी शक्ति जागृत करने में मदद मिलती है। और इस

प्राणायाम को करने से माइग्रेन/अर्धशीशी के रोगी को भी लाभ होता है।

3.) गर्भवती महिलाओं के भ्रामरी प्राणायाम करने से delivery के वक्त शिशु जन्म सहजता से हो

जाता है। और इस प्रणयाम से गर्भवती महिलाओं की अंतःस्त्रावि प्रणाली को अच्छी तरह से काम

करने में मदद मिलती है। (फिर भी गर्भवती महिलायें भ्रामरी प्राणयाम डॉक्टर की सलाह के बाद ही

करें)।

4.) भ्रामरी प्राणायाम के नित्य अभ्यास से सोच सकारात्मक बनती है और व्यक्ति की स्मरण शक्ति

का विकास होता है। तथा इस प्राणायाम से बुद्धि का भी विकास होता है।

bhramari pranayam fayde

भ्रामरी प्राणायाम – सावधानियां

1.) इस आसन का अभ्यास अनुलोम-विलोम प्राणयाम करने के बाद करना चाहिए।

2.) भ्रामरी प्राणायाम करते वक्त अपने कान, आँख या नाक को अधिक ज़ोर से नहीं दबाना चाहिए।

3.) इस आसन हमेशा सुबह के वक्त और खाली पेट करना चाहिए। दिन के अन्य समय पर

इसका अभ्यास किया जा सकता है, पर सुबह में भ्रामरी प्राणायाम करने से दुगना फल प्राप्त होता

है।


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