अस्‍थमा का आयुर्वेदिक उपचार

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अस्‍थमा का आयुर्वेदिक उपचार-अस्थमा (Asthma) एक ऐसी बीमारी है जिसमें आपकी सांस नली में रुकावट के चलते आपको

सांस लेने में दिक्कत महसूस होती है। सांस लेना जीवन जीने के लिए एक बहुत महत्त्वपूर्ण क्रिया है।

अस्‍थमा आमतौर प्रदूषण और कल-कारखानों से निकलने वाले धुएं, सर्दी, फ्लू, धूम्रपान, एलर्जी,

अत्‍यधिक दवाओं के सेवन, शराब की अधिकता आदि कई वजहों से हो सकती है। हालांकि इन

चीजों से बचाव कर अस्‍थमा होने से बचा जा सकता है।  

सांस लेना जीवन जीने के लिए एक बहुत महत्त्वपूर्ण क्रिया है। अतः यदि इस क्रिया में रूकावट आ

जाए तो यह जानलेवा भी हो सकता है।

अस्‍थमा का आयुर्वेदिक उपचार

अस्‍थमा का इलाज आयुर्वेदिक तरीको से :-

विटामिन सी और डी

विटामिन की कमी होने के कारण शरीर कमज़ोरी के लक्षण देता है।

जैसे की खासी, ज़ुखाम, चेहरे पर दाने इत्यादि। इन्ही में से यदि पता लगाना हो की अस्थमा के

लक्षण क्या हैं, तो उनमे बहुत ज़ोर की खांसी आना है जिसकी वजह से सांस तक रुक सकती है।

विटामिन सी एंटी इन्फ्लैमटरी के गुण प्रदान करती है। बिना इस गुण के शरीर के किसी अंग में

सूजन आ सकती है। ठीक यही सांस नली में भी होता है।

मुलेठी

मुलेठी एक बहुत ही असरदार जड़ी है जो गले की कई बिमारियों से निजात पाने में मदद करता है।

आयुर्वेद के साथ साथ मुलेठी का चाइनीस चिकित्सा में भी ज़िक्र किया गया है।मुलेठी सांस नली को

आराम देने में असरदार है।

जंक फ़ूड

जितना नुकसानदायक पैकेज फ़ूड आइटम है, उतना ही नुक्सान आपको जंक फ़ूड यानि बर्गर,

चाउमीन इत्यादि दे सकते हैं। सही प्रकार के व्यंजनों का इस्तेमाल न करना, एवं घटियातेल के

इस्तेमाल से जान लेवा परिस्थितियां भी उत्पन्न हो सकती है।

अदरक और लहसुन

अदरक और लहसुन खाने के कई फायदे हैं जैसे कि इनमे पाए जाने वाले एंटी बायोटिक और एंटी

इन्फ्लामेट्री गुण। इनके कईं लाभ हैं यदि इन्हे सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए।

हल्दी

भारत की कई पारम्परिक व्यंजनों में हल्दी का प्रयोग सदैव होता आया है। मॉडर्न साइंस यह मानती

है कि हल्दी में पाए जाने वाला क्यूमिन के सेवन से ब्रोन्कियल अस्थमा में राहत मिलती है।


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